सोमवार, 30 मार्च 2009

ज़रा सी देर में दिलकश नज़ारा

ज़रा सी देर में दिलकश नज़ारा डूब जायेगा
ये सूरज देखना सारे का सारा डूब जायेगा
नजाने फिर भी क्यों साहिल पे तेरा नाम लिखते हैं
हमें मालूम है इक दिन किनारा डूब जायेगा
सफ़ीना हो के हो पत्थर हैं हम अंज़ाम से वाकिफ़
तुम्हारा तैर जायेगा हमारा डूब जायेगा
समन्दर के सफ़र में किस्मतें पहलु बदलती हैं
अगर तिनके का होगा तो सहारा डूब जायेगा
मिसालें दे रहे थे लोग जिसकी कल तलक हमको
किसे मालूम था वो भी सितारा डूब जायेगा

15 टिप्‍पणियां:

  1. मिसालें दे रहे थे लोग जिसकी कल तलक हमको
    किसे मालूम था वो भी सितारा डूब जायेगा ...

    वाह भाई जान वाह .....

    मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

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  2. bahut acche jatinder
    tumse irshya hone lagi hai aur khushi bhi .........ki tum bahut acche sher kehte ho......badhai...........

    kavideepakgupta.com

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  3. bahut khoob jatinder, sabhi sher umda.
    bahut mubarak.www.swapnyogesh.blogspot.com

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  4. खूबसूरत ग़ज़ल...........
    हर शेर लाजवाब, अनोखे अंदाज का, मजा aa गया पढ़ कर

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  5. ग़ज़ल बहुत अच्छी लगी,बधाई।
    मैनें आप का ब्लाग देखा। बहुत अच्छा लगा।आप
    मेरे ब्लाग पर आयें,यकीनन अच्छा लगेगा और अपने
    विचार जरूर दें।प्लीज.............
    हर रविवार को नई ग़ज़ल,गीत अपने तीनों
    ब्लाग पर डालता हूँ।मुझे यकीन है कि आप
    को जरूर पसंद आयेंगे....
    प्रसन्न वदन चतुर्वेदी

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  6. मिसालें दे रहे थे लोग जिसकी कल तलक हमको
    किसे मालूम था वो भी सितारा डूब जायेगा

    बहुत खूब ......जीतेन्द्र जी अच्छी पकड़ है आपकी....!!

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  7. aapne apne intro me likha hai aapki shayeri samaj ko sudharne ki jaddo jahad hai. meri aapse aik guzarish hai k ager aap chahe ho mere blog k lie prerna se bhari koi kavita bheje. dhanyavaad
    mera blog
    www.salaamzindadili.blogspot.com

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  8. ज्यादातर शेर अच्छे हैं. बधाई!
    www.andaz-e-byan.blogspot.com

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jatinderparwaaz@gmail.com